गुरुवार

मेरी भड़ास


इस छोटी सी दुनिया में में  बहुत से लोग मिलते हैं सच कहूँ तो टकराते हैं .मैं आज तक बहुत से लोगों से मिला हूँ ,कुछ लोग पसंद आये तो कुछ नापसंद, तो कुछ लोग ऐसे भी मिले जिनको मैं इस दुनिया का हिस्सा ही मानता .मतलब ये की वो इन्सान नहीं बल्कि किसी विक्षिप्त जगत से आये हैं .
ये लोग कहीं ना कहीं किसी ना किसी चीज़ में बहुत अच्छे होते हैं ,और उन अच्छी चीज़ों को लेकर वो ऐसे हो जाते हैं की राज ठाकरे बन जाते हैं . मैं ऐसे ही एक इन्सान से मिला जो अपने आप को कहता तो ये है की वो धर्म ,जाति,नस्ल में विश्वास नहीं रखता .विश्वास से अर्थ ये की वो भेदभाव नहीं करता .और ये सब उसकी बातों से झलकता भी है .लेकिन कहीं ना कहीं वो अपने आप को ही धोखा दे रहा होता है .
वो एक जाति को लेकर इतना ज्यादा विरोधी है की ,उसे लगता है की वो पागल हैं .वो इन्सान खुद अपनी जाति की जगह अपने राज्य की साही जाति का बताना पसंद करता है .और वो ये समझता है की हरियाणा में सिर्फ एक ही जाति बस्ती है .वो जो हरियाणा से है उसका दिमाग ही नहीं है,और ना जाने कितने आक्षेप .
मुझे तो सिर्फ उस इन्सान की बातों से एक ही सवाल कुंधता है की क्या ऐसे इन्सान हमारे समाज के लिए खतरनाक नहीं जो इन्सान को इन्सान नहीं समझते .और भी काफी कुछ है कहने को पर आगे बात कहीं ना कहीं निजी हो जाएगी .


बुधवार

मी मराठी , मैं हिन्दी , और दुनिया गयी भाड में


हिन्दी है हम 
वतन हैं हिंदुस्तान हमारा


ये बात अब पुरानी हुई लगती है .खासकर आज महाराष्ट्र विधानसभा में जो भी हुआ है उसके बाद लगता है कि अब ना तो हिन्दी राष्ट्र भाषा रह गयी है और ना ही हिंदुस्तान हिंदुस्तान .अब तो ये महाराष्ट्र ,आसाम,कश्मीर,नागालैंड ,तमिलनाडु जैसे छोटे छोटे राज्य  देश बनते नज़र आ रहे हैं .हम पाकिस्तान और चीन का बहुत हो हल्ला करते रहते हैं लेकिन लगता है कि नक्सली,माओवादी ,उल्फा और ना जाने कितने ही ऐसे संघठन और दल हैं जो हमारे देश से अपने आपको अलग करना चाहते हैं .पहले तो दक्षिण में हिन्दी के विरोध में आन्दोलन चलते थे पर वो शायद ऐसे ना रहे होंगे या मैं कहूँ की वो समय अलग था .आज महाराष्ट्र पर राज करने का सपना लेने वाला राज इतना आगे बढ़ चुका है की ना केवल उतर भारतीयों को पीटा था है बल्कि अब एक विधायक द्वारा हिन्दी में शपथ लेने पर उसके साथ विधानसभा में ही हातापाई  कर दी गयी .
                    6 दशक बाद भी हम आजाद नहीं है .ना समाज से ,ना इन नेताओं से ,ना अपने आप से.बस एक बार किसी के इलाके ,धर्म ,भाषा का नाम ले दिया जाये तो हंगामा हो जाता है .ये सब याद दिलाता है भीष्म साहनी की अमर कृति तमस के उस भाग को जहाँ एक सुवर को मारा जाता है और बाद में अँगरेज़ उस के द्वारा हिन्दू मुस्लिम में दंगे करवा जाते हैं .इस से तो ऐसा लगता है की कहीं ना कहीं आज के नेता अंग्रेजों से कहीं घातक हैं .जो अपने आप को संविधान से ज्यादा मानते हैं .
                    वैसे मुझे लगता है की कहीं ना कहीं जो मुद्दा राज ठाकरे उठा रहे हैं ,या कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बोला वो कहीं ना कहीं सही भी है ,बस बात ये है की उस बात को किस तरीके से दुनिया के सामने रखा जाये.आज तक जो भी  विस्थापन  पूर्व से हुआ है उसमें पुरानी सरकारों का बहुत बड़ा हाथ है .अगर सरकारें सही तरीके से काम करती तो क्या यु.पी.-बिहार में दुसरे इलाकों जितने साधन नहीं है की वो  विकसित  राज्य ना बन सकें .हमारे देश की राजनीती का सबसे अहम् हिस्सा  होते हुए भी वो सबसे बुरी हालत में हैं .इस के चलते पूर्वी यु.पी.-बिहार से नबे के दशक से दुसरे राज्यों में  विस्थापन  शुरू हुआ ,वो कहीं ना कहीं देखा जाये तो उन इलाकों  के लिए एक तरह से विष  बन चुका है .कोई माने ना माने पर हम लोग कुछ हद तक इन बातों को मानते हैं की पूर्व से आये लोगों ने यहाँ के हालत  बहुत बदल दिए  है .और ये  अच्छे हालत  तो बिलकुल भी नहीं है . और वहां से  विस्थापन  का दोष हम उन लोगों पर नहीं लगा सकते .ये इस विशाल देश की एक और दशा है .
                   राज ठाकरे ये भूल जाता है मराठी लोग भी देश के दुसरे हिस्सों में रहते हैं ,फिर तो उन्हें उन मराठी लोगों को अपने राज्य में बुला लेना चाहिए  , ताकि  वो अपनी जन्म भूमि की गोद में मर सकें .आज राज्यों के साथ ऐसा है ,कल फिर एक राज्य के विभिन् इलाकों के लोग कहेंगे की हमारे इलाकों में मत आओ .महाराष्ट्र  में ही कोंकण है जहाँ की भाषा कोंकणी है फिर तो वो लोग मुंबई नहीं जा पाएंगे .कुछ दिनों बाद हालत ये होंगे की भईया अपने जिले में रहो नहीं तो अच्छा  नहीं होगा .वैसे 2012 तो नजदीक ही है .लेकिन  एक बात ये है की अगर ऐसे लोग और 2-4 हो गये तो 2012 की भी जरुरत नहीं है .

right and wrong


You are right and you are wrong. you heard this word from your childhood to your old age. But who decide that this is right and this is wrong. May be your parent or your teacher or political parties or? But the main question is who decides that you are wrong or right and more important is how they know that you are right or wrong.  The thing which is right for you may be wrong for others and the thing which is wrong for me may be right for others. So, by this we can come to a conclusion that the parameter of right and wrong are different for different people. They are just believes and can be vary from city to city, from state to state, from country to country and more over from people to people.



Parents think that they know more and better than their children. They give them useless advice,which seems to be very important to them and for their children. They tell him/her their own experiences and wish from the deepest of their heart that their child fullfil their own unfulfilled desired. Their is nothing wrong in it. But sometimes parents expectations and their control on their own children keep the child mum and quiet. After this child move in the direction in which parents want but his own desire to do anything has been hammered by their own love ones.

(from the blog "known sense" ,"www.saurabhbaweja.blogspot.com")

हरियाणा में चुनाव और न समझ आये मुझे वोट करूँ या ना करूँ


हरियाणा  में कल  चुनाव हैं ,और मुझे  समझ नहीं आ रहा की मैं वोट देने जाऊँ या नहीं . अब इस मसले में २ बातें हैं .पहली तो ये की कुछ महीने  पहले  ही  मैं  रेडियो में  वोट देने के लिए लोगों का ईमान जगा रहा था ,और दूसरा ये की मेरे चुनाव-क्षेत्र में मुझे कोई ऐसा उमीदवार नहीं दिखता की मैं उसे वोट दूँ .दूसरी बात के लिए मैं कहना चाहूँगा की उमीदवार जरुर है पर जिस  पार्टी की वो उमीदवार हैं वो पार्टी प्रदेश में अंग्रेजी गाने नहीं बजेनी देगी अगर वो सता में आती है तो .
वैसे जिस पार्टी की मैं बात कर रहा हूँ उसका हरियाणा की सत्ता में आना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन है .फिर भी इस पुरे वाकया ने मेरे साथ अछी खासी गड़बड़ कर दी है .अब वो बात जो मैंने पहले की थी की मैंने वोटर्स का ईमान जगाया था ,और आज मैं  खुद ही मुश्किल में हूँ की वोट करूँ या नहीं .वैसे हरियाणा  में  इस  बार  जनमत  बहुत साफ़   नज़र आ  रहा  है .

इस बार के चुनावों में सत्ताधारी दल के खिलाफ कोई भी ,विपक्षी दल मजबूत  नहीं दिख रहे हैं .मुख्यमंत्री हूडा ने बेशक कुछ जगह काफी अच्छा  काम किया है पर कहीं जगह वो अपनी  कुछ बड़ी और बहुपर्तिक्षित परियोजनाओं को पूरा नहीं कर पाए या कहें तो अमलीजामा नहीं पहना पाए .सोनीपत में बन रही राजीव गाँधी एजूकेशन सिटी  ४ साल में भी सिर्फ २ कदम ही चल पायी .साथ ही साथ वर्तमान सरकार बिजली के मुद्दे पर अपनी वाही वाही लूटना चाह रही है पर सचाई तो ये है की जो भी बिजली हरियाणा  में बनेगी उसका आधा हिस्सा तो  दिल्ली  को जायेगा .
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कांग्रेस के अलावा किसी भी राष्ट्रीय   दल का हरियाणा में जनाधार  नहीं है. हरियाणा में आया राम गया राम और गठबंधन राजनीती  बहुत रही है .और गठबंधन राजनीती न तो सफल रही है ना ही बहुत साफ़ सुथरी .और इसका नतीजा न केवल जनता बल्कि खुद उन दलों को भी भुगतनी पड़ी जो सत्ता में थे .पिछले सत्ता समय में इनेलो के करता धर्ताओं ने कुछ ऐसे काम किये की उनके खुद के लोग भी उनसे अलग हो गए .और जहाँ तक जनता की बात है तो जनता तो नाराज़ हो ही गयी .और इस बार भी इनेलो के साथ कुछ अच्छा होता नज़र नहीं आ रहा .वहीँ दूसरी तरफ भजनलाल की पार्टी हंज्का शायद अपने परिवार के दम पर १-२ सीट ले जाये तो  बहुत बड़ी बात होगी .
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और आखिर में एक बात की इस बार वोट करना मेरा ईमान नहीं है .और शायद हरियाणा में भी किसी का नहीं हो.

पुलिस की अजीब सनक




जंगल जंगल बात चली है पता चला है
चड्डी पहन कर फूल खिला है फूल खिला है

अब शायद ये पुरानी बात हो जाये .अब तो मोगली को भी पुरे कपडे पहनने पड़ेंगे जी हाँ मुझे भी चड्डी को लेकर एक बात पता लगी है . हरियाणा  के शहर हिसार में पुलिस ने एक नया फरमान सुनाया है जिससे लड़को के कपड़ो पर आपति है . हम ये तो सुनते आयें हैं की इस शहर में उस शहर में लड़कियों के कपड़ो पर ऐतराज़ हुआ है . पर पहली बार ऐसा कुछ सुना है की लड़कों के शोर्ट्स या बरमुडा पहन कर निकलने पर किसी को ऐतराज़ हुआ है .
              बात दरअसल ये है की हिसार पुलिस एक फरमान जारी कर शहरवासिओं को कहा है की वो रात के समय बरमुडा,काचा या फिर निक्कर पहन कर न घूमें . अब इस के पीछे कहानी ये है की पुलिस को कुछ शिकायतें मिली हैं की शोर्ट्स पहने वाले महिलाओं को छेड़ते हैं .अब लगता है की लड़कों को भी बच के रहना पड़ेगा .
              ये बात वैसे हजम करने लायक नहीं है ,क्यूंकि ये बात कुछ ऐसी ही है की लड़कियों के साथ बलात्कार उनके छोटे  कपडों के कारण होता है .ऐसे ही ये बात है की लड़के जब शोर्ट्स में होतें हैं तो लड़कियों को छेडेंगे .देखा  जाये  तो  इस  हिसाब  से  सबसे  ज्यादा बलात्कार गोवा में होने काहेहियें  ,क्यूंकि वहां तो सबसे कम  कपडे पहने जाते हैं.अगर किसी को छेड़खानी कतरनी है तो वो पुरे कपड़ो में भी तो हो सकती है .
              और किस हक से पुलिस किसी को ऐसे गिरफतार कर सकती है की उसने शोर्ट्स पहने हैं .अब समझ में नहीं आता हम कौन  सी दुनिया में रह रहे हैं ,हमारे यहाँ आदमी धोती या लुंगी पहनते रहे हैं .तो उसको भी पुलिस किसी दिन बंद करा देगी ,तो वो लोग जो ६०-७० साल से धोती पहनते आयें हैं वो क्या पहनेगे .पुलिस को अपना काम करना कहिये ,लोगों की सुरक्षा कर के .और उस से भी जरुरी पहले अपनी हरकतों पर नज़र डालें ,फिर कुछ आगे करे.

ये है हमारी आज की दुनिया ...


अगर आप दार्जिलिंग में हाथ नहीं पकडेंगे तो फिर कहाँ जा कर पकडेंगे लगता है कुछ दिनों में हमें हाथों में हाथ डालने के लिए विदेश जाना पड़ेगा. जो भी आज कल हमारे आस पास हो रहा है उसे देख कर तो लगता है ही.ये जय और वीर के लव आज कल से बहुत अलग दुनिया दिखती है.यहाँ आप हाथ नहीं पकड़ सकते यहाँ तक की भाई बहिन भी,भाई बहिन साथ नहीं चल सकते ,काफ़ी शॉप में आप साथ नहीं बैठ सकते .अपनी ही पत्नी को किस नहीं कर सकते तो किस को करेंगे.

बात दरअसल  ये है की अभी कुछ दिन पहले की है जब दार्जलिंग में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने शहर में हाथों में हाथ डाल कर चलने और किसी आपत्तिजनक अवस्ता में घुमते या बैठे देख लिया  तो  आपकी खैर  नहीं .और साथ ही साथ अगर आप नॉएडा में है तो अपने दोस्तों के साथ 10 min  से ज्यादा कैफे में मत बैठयेगा,क्यूंकि क्या पता किस पल स्वयंभू नैतिक पुलिस अपने डंडे लेकर हमारे हाथ पैर तोड़ते मिलेगी .
एक बात ये समझ नहीं आती की क्या हाथ पकड़ने से हमारे समाज में गंदगी  होती है ,या फिर काफ़ी पीने से .आपने कभी किसी सिगरेट पीने वाले को रोक  कर देखा है , और उसका जवाब भी देखा होगा .हम बुरी चीज़ों को रोकने की बजाय छोटी छोटी  चीज़ों पर लड़ते रहते हैं .जींस ना पहनो ,ये मत पहनो वो मत करो ये मत करो .लेकिन क्या कभी किसी नेता को बोला है की तुम इतना झूठ मत बोलो .कभी किसी सरकारी मुलाजिम को रिश्वत देने पर किसी को नैतिकता  याद नहीं आती .प्यार के लिए किसी की जान ले सकते हैं पर किसी गुनाह के लिए आवाज़ उठाएं तो दोषी  उन्हें ही बना दिया जाता है . अपने हित्तों  के लिए आज कुछ लोग देश-समाज को 21वीं सदी की जगह तालिबानी युग की तरफ ले कर जा रहे हैं . 
जैसे जैसे समाज विकसीत   होने की कोशिश कर रहा है वैसे ही कहीं न कहीं से  उसको पीछे धकलने वाले भी आ खड़े होते हैं . 
 घूंघट में गोरी क्यूँ जले 
दो पग भी वो कैसे चले

कोई जाने ना

Mera vote mera imaan ,vande matram


रोते रोते बीतते हैं साल पे साल,
still we don't change भई वाह कमाल,
सड़कों का रोना ,बिजली का रोना ,
रोना है साल भर,पर voting के दिन सोना,

बिजली नहीं है ,सरकार को गाली दो,
छोटी मोटी नहीं ,बड़ी बड़ी वाली दो ,
पानी नहीं है ,कोसो government को,
जैसे दांत नहीं कोसे टूथपेस्ट वालों को,
सड़कों पे गड्ढे ,famliy places पे दारू के अड्डे ,

vote नहीं करदे ,पहन्दे specs, t-shirt ते लम्बे -२ चड्डे
कह्न्दे ,its my style ,जो वोट करे वो पोंगा.
dude जो अब तक नहीं बदला ,तो वोटिंग से क्या होगा .
exams में बिजली गुल ,प्यास लगे तो पानी गुल,
schools हैं building गुल ,आज का youth फिर भी coool.
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रै बिजली के तार पे डाल के काँटा ,गरीबी में गिला आटा ,
पानी का connection काटा ,नेता पुत्र का खा के चांटा ,
सहता जाता corruption ,कमाल है भाई कमाल है यार ,
नोटों की देदे के गड्डी ,तुड़वाता जो सबकी हड्डी ,

हम धोते उसी की चड्डी ,कमाल है भाई कमाल है यार ,
जिसके सर पे 250 case ,अच्छा खासा criminal base,
उसका ही चमकाते face , कमाल है भाई कमाल है यार,
बीते साल में जो करता था टंटा ,जिसने शहर का धर किया बँटा,
तरक्की के नाम पे घंटा , कमाल है भाई कमाल है यार,

school में college में गोली ,जो खेले हमारे खून से होली ,
बोलें हम उसकी ही बोली , कमाल है भाई कमाल है यार,
माँ बहनों का दमन तार ,चोरी ,डकैती ,बलात्कार ,
उसकी करते जय जय कार , कमाल है भाई कमाल है यार,

जिनके लड़के खुद गुंडे ,पाले 10-10 मुस्टंडे ,
फहराते उनके झंडे , कमाल है भाई कमाल है यार,
come on youth stand up n fight ,देश की हालत है अब tight,
vote is the power ,vote is your right ...

तेरे हाथ में है पतवार ,हम सबकी नैया मंझदार ,
पोंछ दो सारी आँखें नम,चलो vote करें हम ,वन्दे मातरम्.
मेरा वोट मेरा ईमान.

hum hindustani

26 janvary ko aaj se 59 saal pehle lal kile ki prachir se jhanda ferhaya gaya tha.

Kuch samjh aaya ,sayad nahi.or jisko aaya kya gussa nahi aaya. Jab maine ye suna tha to mujhe bahut gussa aaya tha. 26 janvary ko hum lal kile se jhanda nahi ferhate,balki us din hamare rastrpati india gate vijay path se parade ko salami dete hain.

Aaj humein 60 saal se jayda ho gayein hain aazadi ko.or hum sayad jante hi nahi ki hum kya hain,kaun hain hum ,hum sayad hindu hain,muslim hain,sikh hain,baniyen hain,Brahman hain,rajput hain, par sayad Hindustani nahi hain.hindustani nahi hain hum,kya jante hain hum Hindustan key bare mein.vaise koi jaroorat nahi hai ki hum jane ki Hindustan mein kya hai kya ho raha hai.

Aaj key din jab ye sab ho raha tha ,tab America mein barrack obama sapath le rahe they pura America yahan tak ki puri duniya us taraf nazar lagaye baitha tha.or hum Hindustani har taraf dekhein to obama obama .sayad itna hum apne bare mein nahi akhbaron mein chapte honge jitna obama key bare mein.main ye nahi keh raha ki obama key bare mein janan,likhna galat hai,main to bas ye keh raha hun ki agar hum bahar ki duniya key bare mein itna kuch jante hain to hum apne desh key bare kyun kuch nahi jante.kyun hum us cheez ko bhul jate  hain ki jo humne bachpan se dekha hai ,padha hai usi cheez ko hum nahi jante.bahut si aisi cheezen hain Hindustan key bare mein jo main nahi janta aap nahi jante ,kyunki sab yaad karna aasan nahi hai,bas ek baat ye hai ki agar aap ko ye bataya ja raha hai ki galti hai aur aap maan nahi rahe ho to fir kisi ka kiya ja sakta hai.

Kaafi kuch hai bolne ko likhne ko lekin sayad kintu parantu is zindagi mein har jagah bas chukka hai ,hum apne desh jismein hum rehte hain jisne humein janam diya hai hum usi ko nahi jante hain.kisi ne kaha bhi hai ki jo kaum  apne ithihas ko bhul jati hai vo kabhi khush nahi rehti hai.hum bhi apne ithihaas ko bhul rahein agar kahun to apne aaj ko bhul rahein hain.purani baton ko jarur bhulna chayie par har purani baat mein kuch na kuch chipa hota hai jo humein yaad rakhna chaiye.

मीडिया , नेता और ........................ मुंबई


मैं सुमित ,बचपन से काफी कुछ देखा सुना है आतंकियों के बारे में ,लेकिन 26 नवम्बर 2008 को मुंबई में जो कुछ भी हुआ उस को देख कर मैं भी एक बार रुक गया था . 3 दिन तक जो मुंबई के समुंदर तट पर जो भी चला उसे पुरी दुनिया ने देखा , वाद प्रतिवाद हुए . हमने आप ने पड़ोसी पर जिम्मेवारी डाली तो उन्होंने हम पर ही जवाब ताल दिया . विरोध प्रदशन भी हुए हमारे नेताओं के खिलाफ , नेता तिलमिला गए .किसी ने बोला की शहीद के घर कुत्ता भी नही जाता तो किसी ने इसे छोटी सी घटना बताया जो की बड़े बड़े शहरों में हो ही जाया करती है .
आज कल समय से भी तेज़ कोई है जिसे लोकतंत्र का चौथा खम्भा भी कहा जाता है . काफ़ी कुछ हुआ ,करोडों लोगों ने सीधे मुंबई के ताज में छेद होते हुए देखे . जान पर खेल कर मीडिया वालों ने पुरी दुनिया को सच्चाई से रु बा रु भी कराया . और इसी चकर में शायद आतंकियों को लाइव सीसीटीवी भी मिल गए , और उन्होंने एक दो तो इसी चक्कर में सटीक निशाना लगा कर उड़ा भी दिया होगा .

इसी हो हाले में आखिर कर 29 नवम्बर को ओपरेशन समुन्दर खत्म हो गया . अब जो ये खत्म हुआ तो शायद कुछ लोगों को मौका मिल गया की अब सरकार पर सिस्टेम पर क्यूँ न बोला जाए . मुझे लगता है की नेताओं की जगह मीडिया ही सरकार चलाये तो कैसा रहे . अब एक बानगी देखिये की उन्हें सब पता है जो की शायद पुलिस ,इंटेलिजेंस को भी न पता हो , पुरा पुरा दिन खोज जरी रहती है .शायद हमारे सुरक्षा वाले इन्ही चैनल्स को देख कर ही हमारी सुरक्षा करतें हैं .

अब ज़रा मैं पते की बात पर आ जाऊँ हमारे प्रतिपक्ष के एक नेता जी मुख्तार अब्बास नकवी जी ने हमलों के बाद ताज के आगे हुए कुछ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कुछ बोल दिया , वैसे वो लोग आए तो थे सरकार ,सिस्टेम के खिलाफ बोलने पर उन लोगों में से कुछ ने नेताओं के खिलाफ निजी टिप्पणी भी कर दी .अब देखिये अगर आप लोगों ने उस प्रदशन को ध्यान से देखा हो तो वो लोग बस कैमरे में आने के लिए आ गए लगते थे . अब एक तेज़ से टीवी वाले चैनल के संवादाता ने उन सो कॉल्ड प्रदर्शनकारियों से बात करनी चाही तो लगा की वो सच में कैमरा दर्शन करने के लिए ही आयें हैं . उस वक्त मैं और मेरे दोस्त के ध्यान में वाही बात आई जो शायद नकवी जी को आई होगी .बस शब्दों का फेर है और रुतबे का भी .उन्होंने उन लोगों को लाली पाउडर वाला बोल दिया तो मैंने soclite बोल दिया .और एक बात ये की मैं कोई नेता अभिनेता नही हूँ एक अदना सा प्राणी हूँ जो अपने भर में खुश है .
अब सवाल ये उठता है की नकवी जी ने क्या ग़लत बोल दिया ,शायद बड़ी बड़ी कंपनियों को ये बात पसंद नही आई होगी की लाली पाउडर के बारे में कुछ बोले ,और समय से तेज़ ,इंडिया से तेज़ मीडिया वालों को एक और मुद्दा मिल गया की नेता लोग तो घबरा गए हैं .

गुस्सा हम सब में हैं ,मुझ में भी है पर इस गुस्से को सही जगह दिखाएँ
आज इस गुस्से से ठीक है उन नेताओं को माफ़ी मांगनी पड़ गई हो ,
अपनी सत्ता से हाथ धोना पड़ गया हो

लेकिन कहीं न कहीं हम अगर ख़ुद भी थोड़ा अपने लिए थोड़ा अपने देश के लिए सोचें तो कैसा रहे . मैं salute करता हूँ उस हर नौ जवान को ,उस शहीद को जिसने अपनी परवाह न करते हुए कितने ही लोगों की जान बचाई .

हमरे सोचने का वक्त है
हम सब के सोचने का वक्त है .

(मुख्तार अब्बास नकवी ने जो कुछ भी कहा एक तरीके से ग़लत था ,फिर भी उन्होंने इतना बोला की वो नाटक था कहीं न कहीं सच है . ये हम मीडिया वाले है जो अर्थ का भी अनर्थ कर देते हैं . फ़िर नेताओं को क्या बोलना आखिर ये भी तो इन्सान ही हैं .अगर कभी उस दिन प्रदशन की क्लीप किसी चैनल पर देखने को मिल जाए तो ज़रा ध्यान से देखना की कौन सच्चा है .)